Electron Ki Khoj Kisne Ki | इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी

Electron Ki Khoj Kisne Ki : दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको एक बहुत ही रोचक बात बताने जा रहे हैं, क्या अपने कभी इलेक्ट्रॉन के बारे सुना है, जरूर सुने होँगे। लेकिन क्या कभी अपने यह सोचा है की इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी? नहीं पता तो कोई बात नहीं क्युकी आज हम आपको बताने जा रहे है की इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी। तो चलिए बिना किसी देरी करे इस प्रश्नो का सही जबाब जानते है और इसका सही जबाब जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए।

दोस्तों, इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी सिर्फ यह जानना ही जरुरी नहीं होता इसके अलाबा भी आपको इलेक्ट्रॉन से संबद्ध कुछ जानकारी भी जानना जरुरी है।

इलेक्ट्रान , प्रोटॉन और न्यूट्रॉन यह तीन कोण को मिलकर एक परमाणु बनाते है और इसके 2 कण यूट्रॉन और प्रोटॉन नाभिक मे होते है तथा इलेक्ट्रान उनके चारों ओर चक्कर लगता है।

इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी?

बर्ष 1897 में ब्रिटिश भौतिकशास्त्री सर जे. जे. थॉमसन ने पहेली बार इलेक्ट्रान कि खोज किया था। और उन्होंने अपने यह खोज में बताया था की एक इलेक्ट्रॉन एक परमाणु कण है जिसका विद्युत आवेश प्राथमिक आवेश के साथ ऋणात्मक होता है। इलेक्ट्रॉन लेप्टन कण परिवार की पहली पीढ़ी से संबंधित हैं और आम तौर पर यह प्राथमिक कणों के रूप में माना जाता है क्योंकि उनके पास कोई ज्ञात घटक या सीमाएं नहीं हैं।

थॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज कैसे की?  

जे. जे. थॉमसन ने पहेली बार इलेक्ट्रान कि खोज किया था।
जे. जे. थॉमसन ने पहेली बार इलेक्ट्रान कि खोज किया था।
  • पूरे दुनिया में सभी पदार्थ-चेतना पदार्थ से बनी है। जॉन डाल्टन ने 19वीं शताब्दी की शुरुआत में परमाणुवाद का अपना सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसे लंबे समय से स्वीकार किया गया था। वह सोचता है की पदार्थ के सबसे छोटी संरचनात्मक इकाई परमाणु है जो अविभाज्य और अविनाशी है। परन्तु अप्रैल को बर्ष 1897 में, ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी जे.जे. “क्रुक्स ट्यूब” पर काम करते हुए, थॉमसन ने एक नए कण की खोज की जो नकारात्मक रूप से चार्ज किया गया था।
  • थॉमसन ट्यूब एक ग्लास ट्यूब थी जिसमें दो धातु इलेक्ट्रोड जुड़े हुए थे। ट्यूब में हवा या गैस निकालने के लिए वैक्यूम पंप की व्यवस्था थी। और जब ट्यूब में दबाव एक मिलीमीटर के हजारवें हिस्से के बराबर था और इलेक्ट्रोड के सिरे दस हजार वोल्ट से जुड़े थे, तो यह पाया गया कि कैथोड से एक प्रकार की किरणें उत्पन्न होती हैं। ये किरणें एनोड की ओर एक सीधी रेखा में चलती हैं और एनोड प्लेट के बीच में स्थित छिद्र से कुछ किरणें आगे धनात्मक प्लेट की ओर मुड़ जाती हैं। इससे यह निष्कर्ष निकला कि ये कण ऋणावेशित हैं। चूंकि वे कैथोड से उत्पन्न हुए हैं, इसलिए उन्हें ‘कैथोड किरणें’ कहा जाता है।  

इलेक्ट्रॉन की खोज कहाँ हुई थी?

बर्ष 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज सर जे जे थॉमसन द्वारा ब्रिटिश लैब में कैथोड किरणों की जांच के दौरान की गई थी।                             

कैथोड रे ट्यूब या सीआरटी

  • थॉमसन ने ट्यूब में इलेक्ट्रोड और गैस की धातु को बार-बार बदलकर इस प्रयोग को दोहराया फिर भी हर बार उन्होंने एक ही बात देखी। इसलिए इन कणों को ‘इलेक्ट्रॉन’ नाम दिया गया है और बाद में इनके आवेश और द्रव्यमान को क्रमशः 1.6 × 10−19 कूलम्ब (सी) और 9.109 × 10−31 किग्रा के रूप में भी जाना जाता है।
  • दो वर्षों के बाद, द्रव्यमान और आवेश के मान भी स्थिर, धातुओं के फोटोइलेक्ट्रिक और थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभावों के परिणामस्वरूप फोटोइलेक्ट्रिक कणों के लिए उपरोक्त प्रयोग के समान पाए गए। इसकी बजसे यह सिद्ध हो गया कि इलेक्ट्रॉन किसी भी तत्व की मूल रचनात्मक इकाई है। वर्ष 1906 में जे जे थॉमसन को उनकी वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

इलेक्ट्रॉन कैसे बनते हैं?

  • थॉमसन के प्रयोग में, जब निकास पाइप में विभिन्न गैसों और विभिन्न धातुओं के कैथोड का उपयोग किया गया, तो यह पाया गया कि प्रत्येक मामले में एक ही प्रकार के कण निकलते हैं और यह ऋणावेशित कण प्रत्येक तत्व के प्रत्येक परमाणु का एक मूलभूत घटक है। इसके अलाबा भी थॉमसन ने प्रयोग द्वारा उनके आवेश और द्रव्यमान का अनुपात पाया। उन्होंने डिस्चार्ज ट्यूब में विभिन्न धातुओं और विभिन्न गैसों के इलेक्ट्रोड का उपयोग करके अलग-अलग डिस्चार्ज ड्रेन का इस्तेमाल किया। वैसे भी, मूल्य केवल कूलम्ब में पाया था। इससे सिद्ध हुआ कि ये कण सभी परमाणुओं के मूलभूत घटक हैं। इन कणों को इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया था।

इलेक्ट्रॉन के बारे में रोचक तथ्य:

जॉन डाल्टन ने कहा कि परमाणु को विभाजित नहीं किया जा सकता है लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आज एक परमाणु तीन कणों में विभाजित है जो है इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन।

और जब यह प्रयोग चल रहा था तब हम जानते थे कि दो प्रकार के आवेश होते हैं: एक है धनात्मक आवेश और दूसरा है ऋणात्मक आवेश, हम यह भी जानते थे कि वे चार्ज कैसे व्यवहार करते हैं लेकिन हम यह नहीं जानते थे कि यह इलेक्ट्रॉन है जो ऋणात्मक चार्ज बनाता है।

इलेक्ट्रॉन पर चार्ज कितना होता है?

इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6 x 10-19 कूलॉम होता है, जो ऋणात्मक रूप से चार्ज होता है।

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान कितना होता है?

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1094×10-31 Kg होता है, जो हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का 1/1837 गुना हो जाता है।

निष्कर्ष :

हेलो दोस्तों, अब आप सही तरह से जान गए होंगे की इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी? अब आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी और धन्यवाद हमारी इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए। आप चहेतो आप हमारी इस आर्टिकल  को अपने फ्रेंड्स या अपने रिस्तेदारो के साथ शेयर कर सकते हो।     

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