Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki | आर्य समाज की स्थापना किसने की थी

Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki : साथियों, मैं जानता हूं कि अभी आपके मन में यह बात जरूर आई होगी कि आर्य समाज की स्थापना किसने की थी। आज हम आपको सुस्त नहीं बनाएंगे, इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि आर्य समाज की स्थापना किसने की थी। इन सवालों का सही जवाब जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki
स्वामी दयानंद सरस्वती

आर्य समाज के बारे में कुछ जानकारी-

भारत की आजादी से पहले यहां कई बुराइयां थीं जो अनादि काल से चली आ रही थीं और बदलते समय के अनुसार उन्हें खत्म करना जरूरी था। उन बुराइयों को सामाजिक रूप से फैलाया गया था और कुछ बुराइयों का संबंध महिलाओं से था।

आर्य समाज की स्थापना किसने की थी?

पहले आपको बता दें कि आर्य समाज एक हिंदू सुधार आंदोलन था, जिसे हिंदू धर्म में सुधार के लिए शुरू किया गया था। आर्य समाज 10 अप्रैल 1875 साल वर्तमान मुंबई में स्वामी दयानंद सरस्वती के द्वारा स्थापित की गयी थी। लेकिन यह आर्य समाज अधिक समय तक नहीं चल सका और स्वामी के बिहारी छोड़ने के बाद इसका अस्तित्व समाप्त हो गया। उसके तीन साल बाद स्वामी जी ने बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की थी। स्वामी दयानंद सरस्वती को आर्य समाज की स्थापना के लिए मथुरा के स्वामी बिरजानंद से प्रेरित किया गया था।

आर्य समाज के लोग वैदिक परंपराओं में विश्वास करते थे। और इसके अलावा आर्य समाज के लोग मूर्ति पूजा, अवतार, अंधविश्वास और कर्मकांडों को पूरी तरह से खारिज करते हैं, आर्य समाज के लोग जातिवाद और छुआछूत जैसी सामाजिक बीमारी का विरोध करते थे। अहा ईश्वर का सर्वोतम और निज नाम “ओम है। आर्य समाज के अनुसार, ब्रह्मांड की उत्पत्ति की अवधि चार अरब 32 करोड़ वर्ष है। और उनके वैदिक राष्ट्र में मांस, शराब, बीड़ी, सिगरेट, चाय, मिर्च-मसाले का कोई स्थान नहीं है।

आर्य समाज महिलाओं और शूद्रों को वेदों का अध्ययन करने और यज्ञ करने का अधिकार देता है। सत्यार्थ प्रकाश, स्वानी दयानंद सरस्वती द्वारा लिखित, आर्य समाज के मुख्य लेखक और स्वीकृत पाठ हैं, इस समाज का आदर्श वाक्य “क्रावंतो विश्वमार्यम” है।

आर्य शब्द का अर्थ क्या है?

आर्य समाज का अर्थ है श्रेष्ठ और प्रगतिशीलों का एक समाज। इसके अलाबा भी आर्य समाज के लोग वैदिक परम्परा में विश्वास करते थे। आर्य समाजियों के आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम राम और योगिराज कृष्ण थे। उन्हीं वेदों को फिर से स्थापित करने के लिए महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की नींव रखी। आर्य समाज के सभी सिद्धांत और नियम वेदों पर आधारित हैं। आर्य समाज सच्चे ईश्वर की पूजा करने के लिए कहता है, यह ईश्वर वायु और आकाश की तरह सर्वव्यापी है, वह अवतार नहीं लेता है, वह सभी मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार फल देता है, अगला जन्म देता है, उसका ध्यान घर में किसी एकांत में होना चाहिए सकता है। आर्य समाज के लोग मूर्ति पूजा, अवतार, बलिदान, झूठे कर्मकांड आदि को स्वीकार नहीं करते हैं।

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने इस संदर्भ में सत्यार्थ प्रकाश नामक एक पुस्तक लिखी। यह ग्रंथ आर्य समाज का मूल ग्रंथ है। अन्य सम्माननीय ग्रंथ हैं – वेद, उपनिषद, षड दर्शन, गीता और वाल्मीकि रामायण आदि। महर्षि दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश में इन सबका सार दिया है।

आर्य समाज के 10 नियम क्या है?

  1. सभी को सिर्फ अपने खुद के हित से सतुष्ट नहीं होना चाहिए. बल्कि ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे पुरे समाज की तरक्की हो सके.
  2. इन्सान को प्रत्येक कार्य धर्मानुसार करने चाहिए. अर्थात इन्सान को प्रत्येक कार्य सत्य और असत्य को ध्यान में रख कर करने चाहिए.
  3. समाज में अविधा का नाश और विधा की वृद्दि करनी चाहिए.
  4. वेदों में सत्य है और वेदों में सत्य विधाए है. वेद का अध्धयन करना प्रत्येक आर्य का अधिकार है.
  5. ईश्वर निराकर, सत्य, पवित्र, दयालु, अनुपम, अनादी, सर्वव्यापक, सर्वाधार, न्यायकारी, अमर, अभय और सृष्टिकर्ता है. और उनकी ही उपासना करनी चाहिए.
  6. मनुष्य को हमेशा सत्य को ग्रहण करने और असत्य को त्यागने के लिए तैयार रहना चाहिए.
  7. जो सत्य विधा और प्रदार्थ विधा से जाने जाते है. उन सबका का आदिमूल परमेश्वर है.
  8. मनुष्य को इस संचार में सबके साथ प्रीतीपूर्वक, धर्मानुसार और यथायोग्य व्यवहार करना चाहिए.
  9. संसार में मनुष्य का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक और धार्मिक उन्नति करना ही है.
  10. सब लोगो को सामाजिक, सर्वहितकारी, नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिए. सबको सबके हित के नियम पालने चाहिए.

लोकप्रिय आर्य समाज-

जब भी आर्य समाज की बात आती है तो सबसे पहले दयानंद सरस्वती का ही नाम लिया जाता है। लेकिन दयानंद सरस्वती के अलावा अन्य लोकप्रिय आर्य समाज जैसे स्वामी श्रद्धानंद, महात्मा हंसराज, लाला लाजपत राय, भाई परमानंद, पंडित गुरु दत्त, स्वामी आनंदबोध सरस्वती, स्वामी अच्युतानंद, चौधरी चरण सिंह, पंडित वंदे मातरम रामचंद्र राव, बाबा रामदेव आदि का रूप  महत्वपूर्ण में लिया जाता है।

आर्य समाज का समाज कुरीतियों नष्ट करने और समाज की उन्नति में लिए और समाज की योगदान-

  • आर्य समाज ना केवल एक धार्मिक संस्थान है. बल्कि यह एक धार्मिक समाज सुधारक और राष्ट्र प्रेम को जागृत करने वाला आन्दोलन है. भारतीय स्वंत्रता संग्राम में अधिकतम स्वंत्रता सेनानी आर्य समाज से थे.
  • आज “नमस्ते” शब्द का उपयोग विदेशी लोग भी अभिवादन करने के लिए करते है. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी. की पहले नमस्ते शब्द का उपयोग भारतीय लोग भी नहीं करते थे. स्वामी जी ने भारतीय सभ्यता और संस्कार को फिर से जागृत किया. और पुरे विश्व में भारतीय संस्कार और आदर्श का प्रचार किया था.
  • स्वामी दयानंद सरस्वती ने धर्म परिवर्तित कर चुके लोगो को फिर से हिन्दू धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया और पुरे देश में शुद्दी आन्दोलन को चलाया.
  • स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित पुस्तक सत्यार्थ पुस्तक ने समाज में देश प्रेम, हिंदी भाषा और हिन्दू धर्म की अलख जगाई थी.
  • वर्ष 1901 में आर्य समाज के सदस्य स्वामी श्राध्दनन्द ने कागदी नामक स्थान पर गुरुकुल विधालय की स्थापना की थी.
  • आर्य समाज के सदस्यों ने विदेशो में जाकर हिंदी भाषा और राष्टीय चेतना का प्रसार किया.
  • वर्ष 1886 में लाहौर में स्वामी के अनुयाय लाला हं सराज ने दयानंद एग्लो वैदिक कॉलेज की स्थापना की थी.
  • आजादी के बाद एवं भारत के विभाजन के बाद धर्म परिवर्तन का शिकार हुए हिंदुओं को मुस्लिम धर्म से दोबारा हिंदू धर्म में प्रवेश करने के अवसर प्राप्त हुए और शुद्धि आंदोलन का आरंभ हुआ।
  • आर्य समाज शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और समाज सुधार पर आधारित आंदोलन है। आर्य समाज के 85% समर्थकों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों के रूप में अपना योगदान दिया था। स्वदेशी आंदोलन का मूल आधार आर्य समाज द्वारा ही जागृत हुआ था।

महिलाओं के हित में आर्य समाज का योगदान क्या था?

आर्य समाज समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने के लिए ही जाना जाता था और इतिहास के समय से ही समाज में महिलाओं के प्रति कई बुराइयां फैली हुई थीं जिन्हें आर्य समाज खत्म करना चाहता था। महिलाओं के हित में आर्य समाज का पहला उद्देश्य लड़का और लड़की को समान दर्जा देना था, जिसके लिए उन्होंने एक आंदोलन शुरू किया और इस शब्द को समाज में फैलाया।

इसके अलावा, विधवा को अभिशाप, दहेज प्रथा, सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह, महिलाओं को वैश्य और दास का दर्जा देने जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए लोगों और समाज में जागरूकता लाई गई। धीरे-धीरे, वहाँ एक था लोगों में परिवर्तन और सती प्रथा और गुलाम रखने आदि के प्रभाव को समाप्त कर दिया गया। विधवा को अभिशाप माना जाता था और पर्दा प्रथा अभी भी कुछ हद तक मौजूद है लेकिन समय के साथ समाज में सुधार हुआ है।

निष्कर्ष

इस लेख में हमने आपको आर्य समाज की स्थापना किसने की और आर्य समाज से संबंधित अन्य जानकारी दी। अगर आपको हमारा इस लेख को पसंद आया तो हमारी इस लेख को अपने फ्रेंड और रिस्तेदारो से साथ शेयर करे। ऐसे ही प्रश्न का सही उत्तोर पढ़ने के लिए कृपा कर के हमारी इस वेबसाइट को फॉलो करें।

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