बैंकों में एनपीए वसूली हेतु विधिक प्रावधान क्या है?

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यदि लोनकर्ता 90 दिनों तक लोन का भुगतान नहीं करता है, तो लोन संस्था उस अकाउंट को एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) घोषित करता है। दरअसल, किसी लोन अकाउंट को एनपीए घोषित करने के बाद बैंक उस एनपीए अकाउंट्स को तीन कैटेगरी में बांटता है- ‘सबस्टैंडर्ड एसेट्स’, ‘डाउटफुल एसेट्स’ और ‘लॉस एसेट्स’।

ऋण खाता एनपीए होने के कारण ऋण संस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में एनपीए वसूली हेतु विधिक प्रावधान बनायें हैं। जिससे बैंक किसी भी व्यक्ति का लोन अकाउंट एनपीए होने पर लोन की रिकवरी करने के लिए कदम उठा सकता है।   

वसूली हेतु विधिक प्रावधान का मतलब है बैंक ऋण वसूली के नियम, लोन न चुकाने पर या लोन अकाउंट NPA होने पर बैंक उस लोन अकाउंट धारक के साथ क्या कर सकता है, आज हम इसके बारे में विस्तार से जानेंगे। 

बैंकों में एनपीए वसूली के लिए यह है विधिक प्रावधान :

भारत सरकार ने बैंकों में हो रहे एनपीए में वृद्धि के लिए वसूली के कानूनी प्रावधान के लिए चार बड़े कदम उठाए हैं :

  1. लोक अदालत की स्थापना
  2. ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) की स्थापना
  3. सरफेसी एक्ट
  4. इनसॉल्वेंसी एण्ड बैंक्रप्ट्सी कोड (IBC)

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1. लोक अदालत की स्थापना

लोक अदालत वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्रों में से एक है, यह एक ऐसा मंच है जहां कानून की अदालत में या पूर्व-मुकदमेबाजी के स्तर पर लंबित विवादों या मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा या समझौता किया जाता है।

भारतीय बैंक संघ के मुख्य कानूनी सलाहकार एमआर उमरजी के अनुसार, 20 लाख रुपये तक के छोटे मूल्य के ऋणों को लोक अदालतों के मंच का उपयोग करके उधारकर्ता और ऋणदाता के बीच सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाया जा सकता है।

आरबीआई की रिपोर्ट

भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 में, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने 4,76,073 ऋण वसूली मामलों को लोक अदालतों में कुल 1,700 करोड़ रुपये भेजा। उन्होंने इस मंच के जरिए 200 करोड़ रुपये वसूले।

2. ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) की स्थापना

इसका उद्देश्य लंबित मामलों को कम करने में मदद करना है। पहले तो 10 लाख रूपए तक का ही ऋण वसूली आवेदन दाखिल होता है, लेकिन बाद में इसे बढ़ा कर दुगना कर दिया है यानि के अभी ऋण वसूली आवेदन दाखिल करने के लिए आर्थिक सीमा 20 लाख रुपये तक है। 

आरबीआई की रिपोर्ट

मार्च 2018 तक के आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार पिछले चार वित्तीय वर्षों में बैंकों द्वारा 3,98,671 करोड़ रुपये की कुल राशि को NPA किया गया था। इसी अवधि में, वसूली के कारण उनके एनपीए में 2,57,980 करोड़ रुपये की कमी आई है।

3. सरफेसी एक्ट

2002 का अपने खराब ऋणों की वसूली के लिए, 2002 में इस सरफेसी अधिनियम वित्तीय संस्थानों को ऋण बकाएदारों से बचाने के लिए लाया गया था। इस कानून के तहत बैंक ऋण के खिलाफ गिरवी रखी गई प्रतिभूतियों पर नियंत्रण कर सकते हैं, अदालत के हस्तक्षेप के बिना बकाया राशि की वसूली के लिए उनका प्रबंधन या बिक्री कर सकते हैं।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) 20 लाख रुपये के ऋण चूक मामलों में वसूली शुरू कर सकती हैं।

4. इनसॉल्वेंसी एण्ड बैंक्रप्ट्सी कोड (IBC)

दिवालिया कंपनियों से जुड़े दावों को हल करने के लिए केंद्र ने 2016 में इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्ट्सी कोड (IBC) को संसद के एक अधिनियम के माध्यम से लागू किया गया था। IBC व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ दिवाला और दिवालियापन की कार्यवाही से निपटने में एहम भूमिका निभाती है।

IBC का उद्देश्य समयबद्ध तरीके से निगमों, व्यक्तियों और साझेदारियों के दिवालियापन को पुनर्गठित और हल करना है। IBC के माध्यम से भारत में दिवालियापन और दिवालियापन की कार्यवाही की प्रक्रिया सरल और तेज़ हो गई, साथ ही भारत की डूबती ऋण समस्या और ऋण संबंधी आदि चीजों का समाधान भी हो गया।

लोन माफ कैसे होगा?

RBI ने एनपीए वसूली हेतु विशेष तौर पर ध्यान दिया है और इसके लिए कुछ गाइडलाइन भी जारी की है :

  • अगर कोई व्यक्ति अपने द्वारा लिए गए कर्ज को नहीं चुकाता है तो आरबीआई के मुताबिक कर्ज डिफाल्टर के खिलाफ बैंक कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
  • यदि उधारकर्ता का चेक बाउंस हो जाता है, तो बैंक कानूनी कार्रवाई कर सकता है और उधारकर्ता पर जुर्माना लगाया जा सकता है और भी भेज सकती है।
  • कर्ज वसूली के लिए बैंक अवैध तरीका नहीं अपना सकता।
  • लोन डिफॉल्टर होने पर, बैंक लोन चूककर्ता को तुरंत जेल नहीं भेज सकता है। लोन चूककर्ता की कार्यवाही करने से पहले बैंक लोन चूककर्ता को नोटिस भेजेगा।
  • कर्ज वसूली के लिए कर्जदार के परिवार को धमकाना अपराध है, ऐसा करने पर रिकवरी एजेंट को जेल भी हो सकती है।
  • बैंक  या लोन संस्था ऋण की रिकवरी के लिए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक ही संपर्क कर सकते हैं।

वसूली प्रक्रिया क्या है?

ऋण की वसूली की प्रक्रिया ऋण के प्रकार और ऋणदाता के आधार पर भिन्न हो सकती है। यहां ऋण वसूली प्रक्रिया का एक सामान्य अवलोकन दिया गया है:

  • रिमाइंडर और नोटिस: ऋणदाता उधारकर्ता को अतिदेय भुगतान करने के लिए कहने के लिए रिमाइंडर या नोटिस भेज सकता है। इसे मेल, ईमेल या एसएमएस के जरिए भेजा जा सकता है।
  • वसूली एजेंट द्वारा उधारकर्ता के साथ संपर्क:: यदि उधारकर्ता रिमाइंडर या नोटिस का जवाब नहीं देता है, तो ऋणदाता इस मामले को रिकवरी एजेंट को उधारकर्ता के पास भेज सकता है। वसूली एजेंट उधारकर्ता से संपर्क कर सकता है और पुनर्भुगतान योजना या निपटान के लिए बातचीत करने का प्रयास कर सकता है।
  • कानूनी कार्रवाई: यदि उधारकर्ता अभी भी अतिदेय भुगतान नहीं करता है या वसूली एजेंट को जवाब नहीं देता है, तो ऋणदाता ऋण की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर सकता है और अदालत में मुकदमा दायर कर सकता है।
  • गिरवी संपत्ति की नीलामी : यदि अदालत ऋणदाता के पक्ष में वसूली आदेश देती है, तो ऋणदाता ऋण की वसूली के लिए उधारकर्ता की गिरवी संपत्ति को बेचकर अपनी लोन राशि को वसूली कर सकता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उपरोक्त प्रक्रिया ऋण समझौते की शर्तों और लागू कानूनों के आधार पर भिन्न हो सकती है।

उधारकर्ताओं को समय पर भुगतान करने का प्रयास करना चाहिए और यदि उन्हें आवश्यक भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो वे ऋणदाता से संपर्क करके ऋण अवधि बढ़ा सकते हैं। कर्ज लेने वाला चाहे तो अपने क्रेडिट स्कोर को ज्यादा नुकसान न पहुंचाए लोन सेटलमेंट भी कर सकता है।

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अंत में :

इन चारो NPA वसूली योजना से बैंक को काफी हद तक राहत मिली है। हम आपको बैंकों में एनपीए वसूली हेतु विधिक प्रावधान के बारे में अभी इतना ही बता सकते है, यदि आपको इससे अधिक जानना है तो आप RBI की ऑफिसियल वेबसाइट पर जा सकते है।  

FAQ – सवाल जवाब

Q. पैसे की वसूली के लिए मुकदमा दायर करने की सीमा क्या है?

पैसे की वसूली के लिए मुकदमा दायर करने की 3 साल की एक सीमा अवधि है जिसके भीतर आपको नोटिस भेजनी होती है और देय धन की वसूली के लिए एक वसूली मुकदमा दायर करना चाहिए।

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